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mahabharat 12.358.7: ‘द्विजश्रेष्ठ ब्राह्मणदेव! अपनी भूख मिटाने के लिए हमारे द्वारा लाए गए फल, शाक, दूध या अन्न को स्वीकार कीजिए।’ 7॥   |   mahabharat अध्याय 12.358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.358.7 
मूलं फलं वा पर्णं वा पयो वा द्विजसत्तम।
आहारहेतोरन्नं वा भोक्तुमर्हसि ब्राह्मण॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘द्विजश्रेष्ठ ब्राह्मणदेव! अपनी भूख मिटाने के लिए हमारे द्वारा लाए गए फल, शाक, दूध या अन्न को स्वीकार कीजिए।’ 7॥
 
‘Dwijasrestha Brahmindev! To satisfy your hunger, please accept the fruits, vegetables, milk or grains brought by us. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)