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mahabharat 12.356.5: आपने मुझे क्या उपदेश दिया? आपने अंधे को दृष्टि प्रदान की। आपकी ज्ञानपूर्ण बातें सुनकर मैं आकाश की ओर देखकर अपने कर्तव्य का विचार करता हूँ।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.356.5 
दत्तचक्षुरिवाकाशे पश्यामि विमृशामि च।
प्रज्ञानवचनाद्योऽयमुपदेशो हि मे कृत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आपने मुझे क्या उपदेश दिया? आपने अंधे को दृष्टि प्रदान की। आपकी ज्ञानपूर्ण बातें सुनकर मैं आकाश की ओर देखकर अपने कर्तव्य का विचार करता हूँ।॥5॥
 
What advice did you give me? You gave sight to a blind man. After listening to your words of wisdom, I look towards the sky and think about my duty. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)