किन्नु मे स्याच्छुभं कृत्वा किं कृतं किं परायणम्।
इत्येवं खिद्यते नित्यं न च याति विनिश्चयम्॥ ७॥
अनुवाद
मेरा क्या हित होगा? मेरा क्या कर्तव्य है और मेरा परम आश्रय कौन है?’ यह सोचकर वह व्याकुल हो जाता था; परन्तु किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता था॥7॥
What will be good for me? What is my duty and who is my ultimate refuge?' He used to get upset thinking about this; but he was unable to reach any decision.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥