श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 353: महापद्मपुरमें एक श्रेष्ठ ब्राह्मणके सदाचारका वर्णन और उसके घरपर अतिथिका आगमन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.353.4 
ज्ञातिसम्बन्धिविपुले सत्त्वाद्याश्रयसम्मिते।
कुले महति विख्याते विशिष्टां वृत्तिमास्थित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसके परिवार में सम्बन्धियों की संख्या बहुत अधिक थी। सभी लोग सत्त्व और सद्गुणों का पालन करते हुए उत्तम जीवन व्यतीत करते थे। उस महान् एवं यशस्वी परिवार में रहकर वह उत्तम जीविका अर्जित करके अपना जीवन-यापन करता था॥4॥
 
The number of relatives in his family was very large. Everyone lived a good life by following the principles of Sattva and virtues. Living in that great and famous family, he earned his living by earning a good livelihood.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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