श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 352: नारदके द्वारा इन्द्रको उञ्छवृत्तिवाले ब्राह्मणकी कथा सुनानेका उपक्रम  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.352.7 
तं कृतक्षणमासीनं पर्यपृच्छच्छचीपति:।
महर्षे किंचिदाश्चर्यमस्ति दृष्टं त्वयानघ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब नारदजी ने बैठकर कुछ देर विश्राम किया, तब शचीपति इन्द्र ने पूछा - 'हे निष्पाप ऋषि! क्या आपने यहाँ कोई आश्चर्यजनक घटना देखी है?॥ 7॥
 
When Naradji had sat and rested for a while, then Sachipati Indra asked - 'O sinless sage! Have you seen any surprising event here?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)