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mahabharat 12.350.10: वहाँ एकान्तवासी ब्रह्मा प्रतिदिन ब्रह्मलोक से आकर आध्यात्मिक उन्नति का चिंतन करते थे और उस वैजयन्त पर्वत का सेवन करते थे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.350.10 
तत्राध्यात्मगतिं देव एकाकी प्रविचिन्तयन्।
वैराजसदनान्नित्यं वैजयन्तं निषेवते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ एकान्तवासी ब्रह्मा प्रतिदिन ब्रह्मलोक से आकर आध्यात्मिक उन्नति का चिंतन करते थे और उस वैजयन्त पर्वत का सेवन करते थे॥10॥
 
There, lonely Brahma used to come every day from Brahmalok to contemplate spiritual progress and eat that Vaijayant mountain. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)