Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.35.50: अथवा यदि उन पूर्व घटनाओं के कारण तुम्हारे मन में कोई द्वेष या पश्चाताप हो, तो उनके लिए प्रायश्चित करो। परंतु अधर्मी पुरुषों के द्वारा उत्पन्न पश्चाताप या क्रोध के वशीभूत होकर आत्महत्या मत करो ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा ते घृणा काचित् प्रायश्चित्तं चरिष्यसि।
मा त्वेवानार्यजुष्टेन मन्युना निधनं गम:॥ ५०॥
अनुवाद
अथवा यदि उन पूर्व घटनाओं के कारण तुम्हारे मन में कोई द्वेष या पश्चाताप हो, तो उनके लिए प्रायश्चित करो। परंतु अधर्मी पुरुषों के द्वारा उत्पन्न पश्चाताप या क्रोध के वशीभूत होकर आत्महत्या मत करो ॥50॥
Or if you have any hatred or remorse in your mind due to those past events, then do penance for them. But do not commit suicide under the influence of regret or anger caused by unrighteous men. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥