श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.35.46 
शक्यते विधिना पापं यथोक्तेन व्यपोहितुम्।
आस्तिके श्रद्दधाने च विधिरेष विधीयते॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
शास्त्रों में बताई गई विधि के अनुसार तप करने से सभी पाप धुल जाते हैं। परंतु यह विधि केवल आस्तिक और भक्त के लिए है ॥ 46॥
 
All sins can be washed away by doing penance as per the method prescribed in the scriptures. But this method is only for the believer and devotee. ॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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