Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.35.42: मनुष्य को चाहिए कि वह केवल शुभ कर्म ही करे, पाप कर्मों से दूर रहे और प्रतिदिन (निःस्वार्थ भाव से) धन का दान करे; ऐसा करने से वह पापों से मुक्त हो जाता है ॥42॥ | mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुर्याच्छुभानि कर्माणि निवर्तेत् पापकर्मण:।
दद्यान्नित्यं च वित्तानि तथा मुच्येत किल्बिषात् ॥ ४२॥
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह केवल शुभ कर्म ही करे, पाप कर्मों से दूर रहे और प्रतिदिन (निःस्वार्थ भाव से) धन का दान करे; ऐसा करने से वह पापों से मुक्त हो जाता है ॥42॥
A man should perform only auspicious deeds, stay away from sinful deeds and donate money daily (selflessly); By doing this he becomes free from sins. 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥