Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.35.28: इसके अतिरिक्त बड़े भाई के विवाह के पश्चात्, पहले से विवाहित छोटे भाई को अपने पितरों के उद्धार के लिए दूसरा विवाह कर लेना चाहिए; ऐसा करने से न तो उसे स्त्री के कारण कोई पाप लगता है और न ही स्त्री स्वयं उसके पापों से कलंकित होती है॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निवेश्यं तु पुनस्तेन सदा तारयता पितॄन्।
न तु स्त्रिया भवेद् दोषो न तु सा तेन लिप्यते॥ २८॥
अनुवाद
इसके अतिरिक्त बड़े भाई के विवाह के पश्चात्, पहले से विवाहित छोटे भाई को अपने पितरों के उद्धार के लिए दूसरा विवाह कर लेना चाहिए; ऐसा करने से न तो उसे स्त्री के कारण कोई पाप लगता है और न ही स्त्री स्वयं उसके पापों से कलंकित होती है॥ 28॥
Besides this, after the marriage of the elder brother, the younger brother who was already married should remarry for the salvation of his forefathers; by doing so he does not incur any sin due to the woman, nor does the woman herself become tainted by his sins.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥