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mahabharat 12.35.24: जिस ब्रह्मचारी का ब्रह्मचर्य व्रत भंग हो गया हो, उसे उस पाप से छुटकारा पाने के लिए ब्रह्मचारी-हत्या के लिए बताए गए व्रत का पालन करना चाहिए और छः महीने तक गोचर्म धारण करना चाहिए; ऐसा करने से वह पाप से मुक्त हो सकता है॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.35.24 
अवकीर्णिनिमित्तं तु ब्रह्महत्याव्रतं चरेत्।
गोचर्मवासा: षण्मासांस्तथा मुच्येत किल्बिषात्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जिस ब्रह्मचारी का ब्रह्मचर्य व्रत भंग हो गया हो, उसे उस पाप से छुटकारा पाने के लिए ब्रह्मचारी-हत्या के लिए बताए गए व्रत का पालन करना चाहिए और छः महीने तक गोचर्म धारण करना चाहिए; ऐसा करने से वह पाप से मुक्त हो सकता है॥ 24॥
 
A brahmacārī whose celibacy vow has been broken should, in order to get rid of that sin, observe the fast prescribed for brahmacārī killing and wear a cow-skin for six months; by doing so he can be freed from sin.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)