Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.35.2-3: यदि किसी ने ब्रह्महत्या कर ली हो, तो उसे भिक्षा मांगकर दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए, अपना सारा काम स्वयं करना चाहिए, हाथ में कपाल और चारपाई धारण करनी चाहिए, सदैव ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए, परिश्रमी रहना चाहिए, किसी में दोष न देखना चाहिए, भूमि पर सोना चाहिए और अपने पापों को संसार को बताते रहना चाहिए। ऐसा बारह वर्षों तक करने से ब्रह्महत्या करने वाला पापों से मुक्त हो जाता है॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि किसी ने ब्रह्महत्या कर ली हो, तो उसे भिक्षा मांगकर दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए, अपना सारा काम स्वयं करना चाहिए, हाथ में कपाल और चारपाई धारण करनी चाहिए, सदैव ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए, परिश्रमी रहना चाहिए, किसी में दोष न देखना चाहिए, भूमि पर सोना चाहिए और अपने पापों को संसार को बताते रहना चाहिए। ऐसा बारह वर्षों तक करने से ब्रह्महत्या करने वाला पापों से मुक्त हो जाता है॥2-3॥
If someone has committed brahmahatya, he should beg for alms and eat only once a day, do all his work himself, keep a skull and a cot in his hands, always observe the vow of celibacy, remain industrious, not see faults in anyone, sleep on the ground and keep revealing his sins to the world. By doing this for twelve years, the brahmahatya becomes free from sins.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥