श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 349: व्यासजीका सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान् नारायणके अंशसे सरस्वतीपुत्र अपान्तरतमाके रूपमें जन्म होनेकी और उनके प्रभावकी कथा  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  12.349.44-45h 
भविष्यस्यचलो ब्रह्मन्नप्रधृष्यश्च नित्यश:।
पुनस्तिष्ये च सम्प्राप्ते कुरवो नाम भारता:॥ ४४॥
भविष्यन्ति महात्मानो राजान: प्रथिता भुवि।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! तुम सदैव अटल और अजेय रहोगे। फिर जब द्वापर और कलियुग का संगम समय आएगा, तब भरतवंश में कुरुवंशी क्षत्रिय होंगे। वह महामनस्वी राजा संसार भर में विख्यात होगा।
 
Brahman! You will always remain steadfast and invincible. Then when the time of confluence of Dwapar and Kaliyuga comes, there will be Kuruvanshi Kshatriyas in Bharatvansh. That great-minded king will be famous throughout the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)