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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन
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श्लोक 9-10h
श्लोक
12.347.9-10h
श्रुत्वाश्वशिरसो मूर्तिं देवस्य हरिमेधस:॥ ९॥
उत्पन्नसंशयो राजा एतदेवमचोदयत्।
अनुवाद
आपकी ही भाँति राजा जनमेजय को भी भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार के विषय में सुनकर संदेह हुआ, तब उन्होंने इस प्रकार प्रश्न किया -॥9 1/2॥
Just like you, King Janmejaya also had doubts after hearing about Lord Vishnu's Hayagriva avatar. Then he asked the question in this manner -॥9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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