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श्लोक  12.347.88 
कारणं पुरुषो ह्येषां प्रधानं चापि कारणम्।
स्वभावश्चैव कर्माणि दैवं येषां च कारणम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष, पुरुष, स्वभाव, कर्म और प्रारब्ध के कारण हैं, वे भी नारायण स्वरूप हैं। 88।
 
The things which are the causes of the person, the chief, the nature, the karma and the destiny are also the form of Narayana. 88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)