vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 84
श्लोक
12.347.84
अपां चापि गुणा राजन् रसा नारायणात्मका:।
ज्योतिषां च परं रूपं स्मृतं नारायणात्मकम्॥ ८४॥
अनुवाद
राजन! जल का गुण और उसका सार भी नारायण का ही स्वरूप है। तेज का सर्वोत्तम गुण भी नारायणमय है। 84.
King! The quality of water and its essence are also the form of Narayana. The best quality of brightness is also Narayanamaya. 84.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd