श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.347.84 
अपां चापि गुणा राजन् रसा नारायणात्मका:।
ज्योतिषां च परं रूपं स्मृतं नारायणात्मकम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
राजन! जल का गुण और उसका सार भी नारायण का ही स्वरूप है। तेज का सर्वोत्तम गुण भी नारायणमय है। 84.
 
King! The quality of water and its essence are also the form of Narayana. The best quality of brightness is also Narayanamaya. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)