श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.347.80 
एष वेदनिधि: श्रीमानेष वै तपसो निधि:।
एष योगश्च सांख्यं च ब्रह्म चाग्रॺं हविर्विभु:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
ये श्रीमन्हरि वेद और तपस्या के भण्डार हैं। वह योग, सांख्य, ब्रह्म, सर्वोत्तम प्रसाद और विभु है। 80.
 
This Shriman Hari is the treasure of Vedas and austerities. He is Yoga, Sankhya, Brahma, the best offering and Vibhu. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)