श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  12.347.77 
आराध्य तपसोग्रेण देवं हयशिरोधरम्।
पञ्चालेन क्रम: प्राप्तो देवेन पथि देशिते॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी के बताए मार्ग पर चलकर तथा घोर तपस्या द्वारा भगवान हयग्रीव की आराधना करके पांचालदेशी गालव ऋषि ने वेदों का क्रमबद्ध विभाजन प्राप्त किया था।
 
Following the path shown by Mahadevji and by worshipping Lord Hayagriva through intense penance, the sage Galava of Panchaldeshi had obtained the division of Vedas in order.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)