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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन
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श्लोक 75
श्लोक
12.347.75
एवमेव महाभागो बभूवाश्वशिरा हरि:।
पौराणमेतत् प्रख्यातं रूपं वरदमैश्वरम्॥ ७५॥
अनुवाद
इस प्रकार महान श्रीहरि ने हयग्रीव का रूप धारण किया। भगवान का यह कल्याणकारी रूप पुराणों में प्राचीन एवं प्रसिद्ध है।
In this way the great Sri Hari assumed the form of Hayagriva. This benevolent form of the Lord is ancient and famous in the Puranas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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