vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 73
श्लोक
12.347.73
दत्त्वा पितामहायाग्रॺां मतिं लोकविसर्गिकीम्।
तत्रैवान्तर्दधे देवो यत एवागतो हरि:॥ ७३॥
अनुवाद
ब्रह्माजी को सृष्टि रचना का उत्तम ज्ञान देकर भगवान नारायणदेव वहाँ अन्तर्धान हो गए और जहाँ से आए थे, वहीं लौट गए॥73॥
Lord Narayandev disappeared there after giving Brahmaji the best wisdom of world creation. They went back to where they came from. 73॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd