श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.347.73 
दत्त्वा पितामहायाग्रॺां मतिं लोकविसर्गिकीम्।
तत्रैवान्तर्दधे देवो यत एवागतो हरि:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी को सृष्टि रचना का उत्तम ज्ञान देकर भगवान नारायणदेव वहाँ अन्तर्धान हो गए और जहाँ से आए थे, वहीं लौट गए॥73॥
 
Lord Narayandev disappeared there after giving Brahmaji the best wisdom of world creation. They went back to where they came from. 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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