ऊचतुश्च समाविष्टौ रजसा तमसा च तौ।
अयं स पुरुष: श्वेत: शेते निद्रामुपागत:॥ ६६॥
अनेन नूनं वेदानां कृतमाहरणं रसात्।
कस्यैष को नु खल्वेष किं च स्वपिति भोगवान्॥ ६७॥
अनुवाद
रजोगुण और तमोगुण से युक्त वे दोनों राक्षस आपस में कहने लगे - 'यह श्वेतवर्णी पुरुष जो गहरी नींद में सोया हुआ है, निश्चय ही पाताल से वेदों का अपहरण करके ले आया है। यह किसका पुत्र है? यह कौन है? और यहाँ सर्पशय्या पर क्यों सो रहा है?'॥ 66-67॥
The two demons, possessed by Rajogunas and Tamogunas, started talking to each other, 'This white-coloured man who is fast asleep, has surely kidnapped the Vedas from the netherworld. Whose son is he? Who is he? And why is he sleeping here on the bed of a serpent's body?'॥ 66-67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥