श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  12.347.55-56h 
स स्वर: सानुनादी च सर्वश: स्निग्ध एव च॥ ५५॥
बभूवान्तर्महीभूत: सर्वभूतगुणोदित:।
 
 
अनुवाद
वह विशेष गान की अत्यंत मधुर एवं मधुर ध्वनि रसातल में सर्वत्र फैल गई, जो समस्त प्राणियों के लिए कल्याणकारी थी ॥55 1/2॥
 
That very sweet and sweet sound of the special song spread everywhere in the abyss, which was beneficial for all living beings. 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)