vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 55-56h
श्लोक
12.347.55-56h
स स्वर: सानुनादी च सर्वश: स्निग्ध एव च॥ ५५॥
बभूवान्तर्महीभूत: सर्वभूतगुणोदित:।
अनुवाद
वह विशेष गान की अत्यंत मधुर एवं मधुर ध्वनि रसातल में सर्वत्र फैल गई, जो समस्त प्राणियों के लिए कल्याणकारी थी ॥55 1/2॥
That very sweet and sweet sound of the special song spread everywhere in the abyss, which was beneficial for all living beings. 55 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×