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mahabharat 12.347.46-47h: ब्रह्माजी की इस प्रकार स्तुति करने पर समस्त मुखों के अंतर्यामी भगवान ब्रह्माजी ने उसी क्षण अपनी निद्रा त्याग दी और वेदों की रक्षा के लिए तत्पर हो गए ॥46 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  12.347.46-47h 
एवं स्तुत: स भगवान् पुरुष: सर्वतोमुख:॥ ४६॥
जहौ निद्रामथ तदा वेदकार्यार्थमुद्यत:।
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी की इस प्रकार स्तुति करने पर समस्त मुखों के अंतर्यामी भगवान ब्रह्माजी ने उसी क्षण अपनी निद्रा त्याग दी और वेदों की रक्षा के लिए तत्पर हो गए ॥46 1/2॥
 
On praising Brahmaji in this way, Lord Brahma, the inner soul of all the faces, gave up his sleep at that very moment and got ready to protect the Vedas. 46 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)