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mahabharat 12.347.43: प्रभु! यह मेरा सातवाँ जन्म है, कमल से उत्पन्न हुआ। त्रिगुणातीत परमेश्वर! मैं प्रत्येक कल्प में आपके पुत्र के रूप में प्रकट होता हूँ।॥43॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.347.43 
इदं च सप्तमं जन्म पद्मजन्मेति वै प्रभो।
सर्गे सर्गे ह्यहं पुत्रस्तव त्रिगुणवर्जित॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! यह मेरा सातवाँ जन्म है, कमल से उत्पन्न हुआ। त्रिगुणातीत परमेश्वर! मैं प्रत्येक कल्प में आपके पुत्र के रूप में प्रकट होता हूँ।॥43॥
 
Lord! This is my seventh birth, born from a lotus. Trigunatita Parameshwar! I appear as your son in every Kalpa. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)