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mahabharat 12.347.42: तत्पश्चात् आपकी नासिका से मेरा पाँचवाँ महान् जन्म वर्णित है। तत्पश्चात् मैं ब्रह्माण्ड से आपके द्वारा उत्पन्न हुआ। वह मेरा छठा जन्म था॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.347.42 
नासिक्यं चापि मे जन्म त्वत्त: परममुच्यते।
अण्डजं चापि मे जन्म त्वत्त: षष्ठं विनिर्मितम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आपकी नासिका से मेरा पाँचवाँ महान् जन्म वर्णित है। तत्पश्चात् मैं ब्रह्माण्ड से आपके द्वारा उत्पन्न हुआ। वह मेरा छठा जन्म था॥ 42॥
 
After that my fifth great birth is narrated from your nose. Thereafter I was produced by you from the universe. That was my sixth birth.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)