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mahabharat 12.347.38: ब्रह्माजी बोले - प्रभु! वेद आपके हृदय हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे मेरे पूर्वज! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। जगत के आदि कारण! जगत में सर्वश्रेष्ठ! सांख्य योग को नियंत्रित करने वाले! प्रभु! मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.347.38 
ब्रह्मोवाच
ॐनमस्ते ब्रह्महृदय नमस्ते मम पूर्वज।
लोकाद्य भुवनश्रेष्ठ सांख्ययोगनिधे प्रभो॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - प्रभु! वेद आपके हृदय हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे मेरे पूर्वज! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। जगत के आदि कारण! जगत में सर्वश्रेष्ठ! सांख्य योग को नियंत्रित करने वाले! प्रभु! मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ।
 
Brahmaji said - Lord! Vedas are your heart, I salute you. O my ancestor! I salute you. The original cause of the world! The best of the world! The one who controls Sankhya Yoga! Lord! I salute you again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)