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mahabharat 12.347.32: ब्रह्माजी बोले - हे प्रभु! वेद मेरे सर्वश्रेष्ठ नेत्र हैं, वेद ही मेरी परम शक्ति हैं, वेद ही मेरे परम आश्रय हैं और वेद ही मेरे सर्वश्रेष्ठ पूज्य देवता हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.347.32 
ब्रह्मोवाच
वेदा मे परमं चक्षुर्वेदा मे परमं बलम्।
वेदा मे परमं धाम वेदा मे ब्रह्म चोत्तरम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - हे प्रभु! वेद मेरे सर्वश्रेष्ठ नेत्र हैं, वेद ही मेरी परम शक्ति हैं, वेद ही मेरे परम आश्रय हैं और वेद ही मेरे सर्वश्रेष्ठ पूज्य देवता हैं।
 
Brahma said - O Lord! Vedas are my best eyes, Vedas are my ultimate strength. Vedas are my ultimate refuge and Vedas are my best worshipped gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)