श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.347.28 
ददृशातेऽरविन्दस्थं ब्रह्माणममितप्रभम्।
सृजन्तं प्रथमं वेदांश्चतुरश्चारुविग्रहान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऊपर जाकर उन्होंने भगवान ब्रह्मा को कमल पुष्प पर विराजमान होकर सृष्टि की रचना में तत्पर देखा। उनके पास ही उन्होंने चारों वेदों को भी सुन्दर रूप में देखा।
 
Going up, he saw the illustrious Lord Brahma, seated on a lotus flower and engaged in the creation of the universe. Also, beside him he saw the four Vedas in beautiful forms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)