श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 347: हयग्रीव-अवतारकी कथा, वेदोंका उद्धार, मधुकैटभका वध तथा नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.347.19 
विद्यासहायवान् देवो विष्वक्सेनो हरि: प्रभु:।
अप्स्वेव शयनं चक्रे निद्रायोगमुपागत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस अवस्था में ज्ञानबल से युक्त सर्वव्यापी भगवान श्री हरि योगनिद्रा का आश्रय लेकर जल में सो गए॥19॥
 
In that state, the omnipresent Lord Shri Hari, endowed with the power of knowledge, took the shelter of Yoga Nidra and slept in the water. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)