श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 346: नारायणकी महिमासम्बन्धी उपाख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.346.15 
सौतिरुवाच
एतत् तु महदाख्यानं श्रुत्वा पार्थिवसत्तम:।
ततो यज्ञसमाप्यर्थं क्रिया: सर्वा: समारभत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सारथिपुत्र कहते हैं - शौनक! वैशम्पायन से यह महान कथा सुनकर राजाओं में श्रेष्ठ जनमेजय ने अपना यज्ञ सम्पन्न करने का कार्य आरम्भ किया।
 
The son of a charioteer says: Shaunak! Having heard this great tale from Vaishampayana, the best of kings, Janamejaya, commenced the work of completing his sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)