श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.345.8 
इज्यते पितृयज्ञेषु तथा नित्यं जगत‍्पति:।
श्रुतिश्चाप्यपरा देवी पुत्रान् हि पितरोऽयजन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पितृ यज्ञों में सदैव श्रीहरि की पूजा की जाती है। एक अन्य श्रुति में कहा गया है कि पितर (देवता) पुत्रों (अग्निस्वत्* आदि) की पूजा करते थे।
 
In Pitr Yajnas, Shri Hari is always worshipped. There is another Shruti that the fathers (Gods) worshipped the sons (Agniswatt* etc.). 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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