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mahabharat 12.345.6: परमब्रह्मा ने प्रसन्न होकर मेरे पिता प्रजापति को उत्पन्न किया। मैं उनके संकल्प से उत्पन्न प्रथम पुत्र हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.345.6 
मम वै पितरं प्रीत: परमेष्ठॺप्यजीजनत्।
अहं संकल्पजस्तस्य पुत्र: प्रथमकल्पित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परमब्रह्मा ने प्रसन्न होकर मेरे पिता प्रजापति को उत्पन्न किया। मैं उनके संकल्प से उत्पन्न प्रथम पुत्र हूँ।
 
The Supreme Brahma was pleased and created my father Prajapati. I am the first son born from his thought.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)