Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.345.23-24: मैं पितामह का भी पिता हूँ और परदादा का भी। मैं ही इस जगत का कारण हूँ। हे ब्राह्मण! ऐसा कहकर देवों के देव भगवान वराह ने वराह पर्वत पर विस्तारपूर्वक पिण्डदान किया और पितरों के रूप में स्वयं की पूजा करके वहीं अन्तर्धान हो गए। 23-24। | mahabharat अध्याय 12.345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं पितामह का भी पिता हूँ और परदादा का भी। मैं ही इस जगत का कारण हूँ। हे ब्राह्मण! ऐसा कहकर देवों के देव भगवान वराह ने वराह पर्वत पर विस्तारपूर्वक पिण्डदान किया और पितरों के रूप में स्वयं की पूजा करके वहीं अन्तर्धान हो गए। 23-24।
I am the father of the grandfather and also the great grandfather. I am the cause of this universe. O Brahmin! After saying this, the lord of gods, Lord Varaha, offered Pinddan in detail on Varaha mountain and after worshipping himself in the form of ancestors, disappeared there. 23-24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥