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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 345: भगवान् वराहके द्वारा पितरोंके पूजनकी मर्यादाका स्थापित होना
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श्लोक 20
श्लोक
12.345.20
त्रयो मूर्तिविहीना वै पिण्डमूर्तिधरास्त्विमे।
भवन्तु पितरो लोके मया सृष्टा: सनातना:॥ २०॥
अनुवाद
तीन पितर निराकार या निराकार हैं, जो भौतिक रूप में प्रकट हुए हैं; ये इस संसार में मेरे द्वारा बनाए गए शाश्वत पितर हैं।
The three Pitris are formless or incorporeal, who have appeared in physical form; these are the eternal Pitris created by me in this world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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