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श्लोक 12.344.9  |
तस्माद् देवात् समुद्भूत: स्पर्शस्तु पुरुषोत्तमात्।
येन स्म युज्यते वायुस्ततो लोकान् विवात्यसौ॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| उन्हीं भगवान् पुरुषोत्तम से स्पर्श उत्पन्न हुआ है, जिससे वायुदेव संयुक्त होते हैं और उन्हीं से संयुक्त होकर वे समस्त लोकों में प्रवाहित होते हैं॥9॥ |
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| It is from the same Lord Purushottama that touch has originated, by which the wind god is united and by being united with him he flows in all the worlds.॥ 9॥ |
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