श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.344.9 
तस्माद् देवात् समुद्भूत: स्पर्शस्तु पुरुषोत्तमात्।
येन स्म युज्यते वायुस्ततो लोकान् विवात्यसौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्हीं भगवान् पुरुषोत्तम से स्पर्श उत्पन्न हुआ है, जिससे वायुदेव संयुक्त होते हैं और उन्हीं से संयुक्त होकर वे समस्त लोकों में प्रवाहित होते हैं॥9॥
 
It is from the same Lord Purushottama that touch has originated, by which the wind god is united and by being united with him he flows in all the worlds.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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