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श्लोक 12.344.8  |
तस्मादेव समुद्भूतं तेजो रूपगुणात्मकम्।
येन संयुज्यते सूर्यस्ततो लोके विराजते॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| उन्हीं से रूप और गुणों के अनुरूप वह तेज प्रकट हुआ है, जिससे सूर्यदेव संयुक्त हैं। इसीलिए वे जगत में प्रकाशित हो रहे हैं ॥8॥ |
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| It is from them that the radiance specific to the form and qualities has emerged, with which the Sun God is united. That is why he is shining in the world. ॥ 8॥ |
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