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श्लोक 12.344.7  |
तस्माच्चोत्तिष्ठते देवात् सर्वभूतहिताद् रस:।
आपो हि तेन युज्यन्ते द्रवत्वं प्राप्नुवन्ति च॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| जो रस जल से युक्त है और जिसके कारण जल द्रवीभूत हो जाता है, वह उन नारायण देव से उत्पन्न हुआ है जो समस्त प्राणियों का कल्याण चाहते हैं। ॥7॥ |
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| Juice, which is in union with water and because of which water becomes liquefied, has emerged from that Narayana Deva who seeks the welfare of all beings. ॥ 7॥ |
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