श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.344.7 
तस्माच्चोत्तिष्ठते देवात् सर्वभूतहिताद् रस:।
आपो हि तेन युज्यन्ते द्रवत्वं प्राप्नुवन्ति च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो रस जल से युक्त है और जिसके कारण जल द्रवीभूत हो जाता है, वह उन नारायण देव से उत्पन्न हुआ है जो समस्त प्राणियों का कल्याण चाहते हैं। ॥7॥
 
Juice, which is in union with water and because of which water becomes liquefied, has emerged from that Narayana Deva who seeks the welfare of all beings. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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