श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.344.19 
समाहितमनस्काश्च नियता: संयतेन्द्रिया:।
एकान्तभावोपगता वासुदेवं विशन्ति ते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जिनका मन एकाग्र है, जो शौच, संतोष आदि नियमों से परिपूर्ण हैं और जो जितेन्द्रिय हैं, वे पूर्ण भक्ति से भगवान के शरणागत हुए भक्तजन वासुदेव में साक्षात् प्रवेश करते हैं ॥19॥
 
Those devotees who have concentrated their minds, who are full of the rules of toilet, satisfaction etc. and who have Jitendriya, those devotees who have surrendered to God with complete devotion, enter Vasudeva face to face. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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