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श्लोक 12.344.16-17h  |
प्रद्युम्नाच्चापि निर्मुक्ता जीवं संकर्षणं तत:॥ १६॥
विशन्ति विप्रप्रवरा: सांख्या भागवतै: सह। |
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| अनुवाद |
| वे सांख्य ज्ञान से युक्त श्रेष्ठ ब्राह्मण भी प्रद्युम्न के साथ संयुक्त होकर भगवान् के भक्तों के साथ जीवों के आकर्षण में प्रवेश करते हैं ॥16 1/2॥ |
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| Being also united with Pradyumna, those great brahmins endowed with Sankhya knowledge enter into the attraction of living beings with the devotees of God. 16 1/2॥ |
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