श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.344.12 
सद्भूतोत्पादकं नाम तत् स्थानं वेदसंज्ञितम्।
विद्यासहायो यत्रास्ते भगवान् हव्यकव्यभुक्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जिस स्थान पर भगवान हरि ज्ञानशक्ति सहित विराजमान होकर हवि और नैवेद्य ग्रहण करते हैं, वह स्थान सत्त्व को उत्पन्न करने वाला स्थान कहलाता है ॥12॥
 
The place where Lord Hari is seated with the power of knowledge, accepting the offerings of oblations and offerings, is known as the place which produces true existence. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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