श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.344.11 
तस्माच्चोत्तिष्ठते देवात् सर्वभूतगतं मन:।
चन्द्रमा येन संयुक्त: प्रकाशगुणधारण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों में जो मन स्थित है, वह भी उन्हीं नारायणदेव से उत्पन्न हुआ है। उसी मन से युक्त होकर चन्द्रमा प्रकाश गुण को प्राप्त करता है ॥11॥
 
The mind that resides in all living beings has also originated from the same Narayandev. It is by being united with that mind that the moon acquires the quality of light. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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