श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 344: नर-नारायणका नारदजीकी प्रशंसा करते हुए उन्हें भगवान् वासुदेवका माहात्म्य बतलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.344.10 
तस्माच्चोत्तिष्ठते शब्द: सर्वलोकेश्वरात् प्रभो:।
आकाशं युज्यते येन ततस्तिष्ठत्यसंवृतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उन्हीं प्रभु से, जो सम्पूर्ण लोकों के स्वामी हैं, शब्द उत्पन्न होता है, जिनसे आकाश निरन्तर जुड़ा रहता है और जिनके कारण वह अनावृत रहता है ॥10॥
 
From that same Lord, the Lord of all worlds, the sound emerges, with whom the sky is in constant connection and because of whom it remains uncovered. ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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