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mahabharat 12.343.45-46h: तत्पश्चात् आतिथ्य स्वीकार करके, वहाँ सुखपूर्वक बैठकर विश्राम करने के पश्चात नारायण ने नारदजी से इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  12.343.45-46h 
अथ नारायणस्तत्र नारदं वाक्यमब्रवीत्॥ ४५॥
सुखोपविष्टं विश्रान्तं कृतातिथ्यं सुखस्थितम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आतिथ्य स्वीकार करके, वहाँ सुखपूर्वक बैठकर विश्राम करने के पश्चात नारायण ने नारदजी से इस प्रकार कहा।
 
Thereafter, after accepting the hospitality and sitting comfortably and resting there, Narayana spoke thus to Narada. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)