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mahabharat 12.343.41-42h: ऐसा मन में विचार करके उसने उन दोनों की परिक्रमा की और फिर एक सुन्दर गद्दी पर बैठ गया।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  12.343.41-42h 
इति संचिन्त्य मनसा कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम्॥ ४१॥
स चोपविविशे तत्र पीठे कुशमये शुभे।
 
 
अनुवाद
ऐसा मन में विचार करके उसने उन दोनों की परिक्रमा की और फिर एक सुन्दर गद्दी पर बैठ गया।
 
Thinking this in his mind, he circumambulated them both and then sat on a beautiful cushion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)