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mahabharat 12.343.29-30h: वैशम्पायन जी बोले: उन परम तेजस्वी भगवान व्यास जी को नमस्कार है, जिनकी कृपा से मैं भगवान नारायण की यह कथा कह रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  12.343.29-30h 
वैशम्पायन उवाच
नमो भगवते तस्मै व्यासायामिततेजसे॥ २९॥
यस्य प्रसादाद् वक्ष्यामि नारायणकथामिमाम्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी बोले: उन परम तेजस्वी भगवान व्यास जी को नमस्कार है, जिनकी कृपा से मैं भगवान नारायण की यह कथा कह रहा हूँ।
 
Vaishmpayana said: Salutations to the infinitely illustrious Lord Vyasa, by whose grace I am narrating this story of Lord Narayana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)