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mahabharat 12.343.2: हे सूतकुमार! समस्त ऋषियों के आश्रमों में जाना और समस्त तीर्थों में स्नान करना भी भगवान नारायण की कथा के समान फलदायी नहीं है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.343.2 
सर्वाश्रमाभिगमनं सर्वतीर्थावगाहनम्।
न तथा फलदं सौते नारायणकथा यथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे सूतकुमार! समस्त ऋषियों के आश्रमों में जाना और समस्त तीर्थों में स्नान करना भी भगवान नारायण की कथा के समान फलदायी नहीं है॥ 2॥
 
O Sutkumar! Visiting all the ashrams of sages and bathing in all the holy places is also not as fruitful as the story of Lord Narayana.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)