Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.343.15-16: द्विजश्रेष्ठ! उन भगवान नारायण की महिमा अद्भुत है। मनुष्यों के लिए उनकी ओर देखना भी कठिन है। कल्प के अंत में जिनके भीतर ब्रह्मा आदि सभी देवता, ऋषि, गन्धर्व और चराचर जगत में विद्यमान सभी प्राणी विलीन हो जाते हैं, मैं उनसे बढ़कर इस पृथ्वी और स्वर्ग में किसी अन्य को पवित्र और महान नहीं मानता। 15-16॥ | mahabharat अध्याय 12.343: जनमेजयका प्रश्न, देवर्षि नारदका श्वेतद्वीपसे लौटकर नर-नारायणके पास जाना और उनके पूछनेपर उनसे वहाँके महत्त्वपूर्ण दृश्यका वर्णन करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्विजश्रेष्ठ! उन भगवान नारायण की महिमा अद्भुत है। मनुष्यों के लिए उनकी ओर देखना भी कठिन है। कल्प के अंत में जिनके भीतर ब्रह्मा आदि सभी देवता, ऋषि, गन्धर्व और चराचर जगत में विद्यमान सभी प्राणी विलीन हो जाते हैं, मैं उनसे बढ़कर इस पृथ्वी और स्वर्ग में किसी अन्य को पवित्र और महान नहीं मानता। 15-16॥
Dwijshreshtha! The glory of that Lord Narayana is amazing. It is difficult for humans to even look at him. At the end of the Kalpa, within whom all the gods like Brahma, Rishis, Gandharvas and everything that exists in the living world disappears, I do not consider anyone else in this earth and heaven more holy and great than him. 15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥