vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना
»
श्लोक 29-30h
श्लोक
12.341.29-30h
न हि विष्णु: प्रणमति कस्मैचिद् विबुधाय च॥ २९॥
ऋते आत्मानमेवेति ततो रुद्रं भजाम्यहम्।
अनुवाद
भगवान विष्णु अपने स्वरूप रुद्र के अतिरिक्त अन्य किसी देवता को प्रणाम नहीं करते; इसलिए मैं रुद्र की पूजा करता हूँ।
Vishnu does not bow to any other deity except Rudra, his own self; therefore I worship Rudra. 29 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×