श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  12.341.29-30h 
न हि विष्णु: प्रणमति कस्मैचिद् विबुधाय च॥ २९॥
ऋते आत्मानमेवेति ततो रुद्रं भजाम्यहम्।
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु अपने स्वरूप रुद्र के अतिरिक्त अन्य किसी देवता को प्रणाम नहीं करते; इसलिए मैं रुद्र की पूजा करता हूँ।
 
Vishnu does not bow to any other deity except Rudra, his own self; therefore I worship Rudra. 29 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)