श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  12.341.25-26 
मया प्रमाणं हि कृतं लोक: समनुवर्तते॥ २५॥
प्रमाणानि हि पूज्यानि ततस्तं पूजयाम्यहम्।
यस्तं वेत्ति स मां वेत्ति योऽनुतं स हि मामनु॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सभी लोग मेरे ही कार्य को प्रमाण या आदर्श मानकर उसका अनुसरण करते हैं। केवल उन्हीं देवताओं की पूजा करनी चाहिए जिनकी पूजनीयता वेदों से सिद्ध हो। ऐसा सोचकर मैं रुद्रदेव की पूजा करता हूँ। जो रुद्र को जानता है, वह मुझे जानता है। जो उनका अनुसरण करता है, वह मेरा भी अनुसरण करता है।
 
Everyone follows my work considering it as proof or ideal. Only those gods should be worshipped whose worshipability is proved by the Vedas. Thinking this, I worship Rudradev. Whoever knows Rudra, he knows me. Whoever follows him, he follows me too.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd