Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.88-89: श्री भगवान बोले - श्रेष्ठ! तुम्हें उन्हीं देशों का भोजन करना चाहिए जहाँ वेद, यज्ञ, तप, सत्य, इन्द्रिय संयम और अहिंसा का प्रचलन हो। ऐसा करने से अधर्म तुम्हें एक पैर से भी स्पर्श नहीं कर सकेगा। | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीभगवानुवाच
यत्र वेदाश्च यज्ञाश्च तप: सत्यं दमस्तथा॥ ८८॥
अहिंसाधर्मसंयुक्ता: प्रचरेयु: सुरोत्तमा:।
स वो देश: सेवितव्यो मा वोऽधर्म: पदा स्पृशेत्॥ ८९॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले - श्रेष्ठ! तुम्हें उन्हीं देशों का भोजन करना चाहिए जहाँ वेद, यज्ञ, तप, सत्य, इन्द्रिय संयम और अहिंसा का प्रचलन हो। ऐसा करने से अधर्म तुम्हें एक पैर से भी स्पर्श नहीं कर सकेगा।
Shri Bhagwan said – Best of all! You should eat only those countries where Vedas, Yagya, penance, truth, restraint of senses and non-violence are prevalent. By doing this, unrighteousness will not be able to touch you even with a single foot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥